Manushya Ka Dimag Hi Sab Kuch Hai
मनुष्य का दिमाग ही सब कुछ है, जो वह सोचता है, वही वह बनता है…
मनुष्य का दिमाग ही सब कुछ है, जो वह सोचता है, वही वह बनता है…
निंदा तो उसी की होती है जो ज़िंदा है, मरे हुए की तो बस तारीफ ही होती है…
यदि जीवन में लोकप्रिय होना हो तो, सबसे ज्यादा “आप” शब्द का, उसके बाद “हम” शब्द का और सबसे कम “मैं” शब्द का उपयोग करना चाहिए…
लोग शायद ही कभी सफल होते है, जब तक की जो वो कर रहे है उस मे आनंद ना ले…