शुभ संक्रांत | Shubh Sankrant

विसरुनी जा दुःख तुझे हे, मनालाही दे तू विसावा.. आयुष्याचा पतंग तुझा हा, प्रत्येक क्षणी गगनी भिडावा… शुभ संक्रांत!

Aayushya Matra Ekdach Ka

चांदणं तेच असलं तरी, रात्र अगदी नवीन आहे, आयुष्य मात्र एकदाच का? हा प्रश्न जरा कठीण आहे…

Jal Hi Jeevan Hai

मित्रो जिस प्रकार जल ही जीवन है, उसी प्रकार पेड़ पौधे उस जल रूपी जीवन को, संरक्षित रखने का एक कारगर स्त्रोत है!

Jo Mera Dhyaan Karta Hai

अगर कोई भक्त मेरा ध्यान करता है, मेरे नाम का स्मरन करता है, और मेरे तप का गुणगान करता है, तो इसमें उसका उद्धार निश्चित है, इस तरह वह कर्म से मुक्त हो जाता है, और मैं सदा उसके साथ रहता हूँ…