Hamari Kismat Me Chahat Nahi
हमे उनसे कोई शिकायत नहीं, शायद हमारी ही किसमत में चाहत नहीं, मेरी तक़दीर को लिखकर तो ऊपर वाला भी मुकर गया, पूछा तो कहा ये मेरी लिखावट नहीं…
हमे उनसे कोई शिकायत नहीं, शायद हमारी ही किसमत में चाहत नहीं, मेरी तक़दीर को लिखकर तो ऊपर वाला भी मुकर गया, पूछा तो कहा ये मेरी लिखावट नहीं…
जो वक्त के साथ बदल जाये वो यार कैसा, जो ज़िन्दगी भर साथ न दे वो हमसफ़र कैसा, अक्सर लोग प्यार में कसमे खाते है, जो कसमों का मोहताज हो वो प्यार कैसा..?
कहते है की बिना मेहनत किये, कुछ पा नहीं सकते, ना जाने गम पाने के लिए, कौन सी मेहनत कर ली मैंने…
वक्त ने हमको चुप रहना सिखा दिया, और हालातों ने सब कुछ सहना सिखा दिया, अब किसी की आस नहीं ज़िन्दगी में, इन तन्हाइयों ने हमे अकेले रहना सिखा दिया…