Jaise Bhi Ho Meri Jaan Ho Tum
थोड़े नादान थोड़े बदमाश, हो तुम, मगर जैसे भी हो, मेरे लिए मेरी, “जान” हो तुम…
थोड़े नादान थोड़े बदमाश, हो तुम, मगर जैसे भी हो, मेरे लिए मेरी, “जान” हो तुम…
लोहा नरम होकर, औजार बन जाता है! सोना नरम होकर, जेवर बन जाता है! मिटटी नरम होकर, खेत बन जाती है! आटा नरम होता है तो, रोटी बन जाती है! ठीक इसी तरह अगर, इंसान भी नरम हो जाये, तो लोगो के दिलों में, अपनी जगह बना लेता है…!
जब छोटे थे तब हर बात भूल जाया करते थे, तब दुनिया कहती थी की “याद करना सीखो” अब बड़े हुए तो हर बात याद रहती है, तो दुनिया कहती है की “भूलना सीखो” “कैसी अजीब दुनिया है!”
दिल पर लिखे थे जो, वो लफ्ज उसके थे… आँखों में सजाये थे जो, वो ख्वाब उसके थे… जब हमने पूछा उनसे, कितना प्यार है हमसे, मर जायेंगे तुम्हारे बिना, ये अल्फाज उसके थे…!