Nahi Rehta Koi Shakhs Adhoora Kisi Ke Peeche
नही रहता कोई शख्स, अधुरा किसी चीज के पीछे, वक्त गुजर ही जाता है, कुछ पा कर भी कुछ खो कर भी…
नही रहता कोई शख्स, अधुरा किसी चीज के पीछे, वक्त गुजर ही जाता है, कुछ पा कर भी कुछ खो कर भी…
फुरसत किसे है जख्मों पे मरहम लगाने की, निगाहें बदल गई अपने और बेगाने की, तु ना छोडना दोस्ती का हाथ वरना, तमन्ना मिट जाएगी कभी दोस्त बनाने की…
एक अजीब दास्तान है मेरे अफसाने की, मैने पल पल कोशिश की उसके पास जाने की, किस्मत थी मेरी या साजिश थी ज़माने की, दूर हुए इतना जितनी उम्मीद थी करीब आने की…
जिंदगी ऎसी हो जो जिने को मजबुर करे, राहे ऎसी हो जो चलने को मजबुर करे, खुशबू कभी दोस्ती की कम ना हो, दोस्ती ऎसी हो जो मिलने को मजबुर करे…