Udne De In Parindo Ko Ajad Feejao Me by Neha Kulkarni - Reading Time: 5 mins read ADVERTISEMENT मिर्जा ग़ालिब… “उड़ने दे इन परिंदों को आजाद फिजाओ में… जो तेरे अपने होंगे वो लौट आएंगे” शायर इक़बाल का जवाब… “न रख उम्मीद-ए-वफ़ा किसी परिंदे से… जब पर निकल आते है, तब अपने भी आशियाना भूल जाते है” ADVERTISEMENT