Kash Koi Insaniyat Day Bhi Hota by Neha Kulkarni - Reading Time: 5 mins read ADVERTISEMENT काश कोई रोटी डे होता, तो लोग भुख से बिखलते लोगों को रोटी बांटते, काश कोई कपडा डे होता, तो लोग ठंड से ठिठुरते लोगों को कपडे बांटते, काश कोई इंसानियत डे भी होता, तो लोग इंसानियत क्या होती है समझ पाते…