Har Haal Me Hanste Rehna by Neha Kulkarni - Reading Time: 5 mins read ADVERTISEMENT जिंदगी हर हाल मे ढलती है, जैसे रेत मुट्ठी से फिसलती है, गिले शिकवे कितने भी हो, हर हाल मे हँसते रहना, क्योंकि जिंदगी ठोकरों से ही संभलती है…