Fursat Kise Hai Zakhmon Pe Marham Lagane Ki by Neha Kulkarni - Reading Time: 5 mins read ADVERTISEMENT फुरसत किसे है जख्मों पे मरहम लगाने की, निगाहें बदल गई अपने और बेगाने की, तु ना छोडना दोस्ती का हाथ वरना, तमन्ना मिट जाएगी कभी दोस्त बनाने की…