वो मेरा दोस्त जो खुदा जैसा लगता है, दिल के पास है फिर भी जुदा सा क्यों लगता है, काफी दिनों से आया नहीं कोई पैगाम उसका, शायद कोई बात पे हमसे खफा सा लगता है…
बिते हुए कल मे फिर से जाने का दिल करता है, फिर से हँसने और हँसाने का दिल करता है, जो कुछ पल साथ बिताये थे हमने, वो लम्हा फिर से जी जाने का दिल करता है…