मिली थी जिंदगी, किसी के काम आने के लिए.. पर वक्त बित रहा है, कागज के टुकड़े कमाने के लिए.. क्या करोगे इतना पैसा कमा कर..? ना कफन में ‘जेब’ है ना कब्र में ‘अलमारी...
जीवन की आधी उम्र तक पैसा कमाया, पैसा कमाने में इस शरीर को ख़राब किया! बाकि आधी उम्र तक उसी पैसे को, शरीर ठीक करने में लगाया.. ना शरीर बचा, ना पैसा.. वाह रे जिंदग...