“दर्पण” जब चेहरे का “दाग” दिखाता है, तब हम “दर्पण” नहीं तोड़ते, बल्कि “दाग” साफ़ करते है… उसी प्रकार, हमारी “कमी” बताने वाले पर, “क्रोध” करने के बजाय, अपनी “कमी” ...
अर्ज किया है… बैठ के टॉयलेट में नवाब के जैसे, ठंडी के मौसम में सोचता हूँ ऐसे, वाह वाह… वाह वाह… बैठ के टॉयलेट में नवाब के जैसे, ठंडी के मौसम में सोचता हूँ ऐसे, ...
हर सुबह की धूप कुछ याद दिलाती है, हर महकती खुशबू एक जादू जगाती है, ज़िन्दगी कितनी भी व्यस्त क्यों न हो, निगाहों पर सुबह-सुबह “अपनों” की याद आ ही जाती है…