बिन बताये उसने ना जाने क्यों ये दूरी कर दी, बिछड़ के उसने मोहब्बत ही अधूरी कर दी, मेरे मुकद्दर में ग़म आये तो क्या हुआ, खुदा ने उसकी ख्वाहिश तो पूरी कर दी…
तेरी बेवफाई पे भी मुस्कुराते हैं हम, मुस्कुरा के अपना गम छुपाते हैं हम, जब कभी अकेले में बात करने का मन करता है तुझसे, तो तन्हाइयों में बैठकर तेरी यादों को पास ...